इतिहास गुरुद्वारा माछीवाड़ा
माछिवाडा भारतीय राज्य पंजाब के लुधियाना जिले में विकासशील शहरों में से एक है । माछीवाड़ा गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े गुरुद्वारा श्री चरणकमल साहिब के लिए प्रसिद्ध है इसका नाम गुरु के चरणों के नाम पर रखा गया है
माछीवाड़ा नाम माछी (मछली)से आया है। सतलुज नदी माछीवाड़ा से 13 किमी दूर बहती है। गुरु गोबिंद सिंह के समय में, इस क्षेत्र को लाखी जंगल के नाम से जाना जाता था
गुरु गोबिंद सिंह और माछीवाड़ा
आनदपुर साहिब का किला छोड़ने के बाद गुरु गोविंद सिंह जब सरसा नदी पर पहुंचे तो उनका परिवार तीन भागों में बिछुड़ गया गुरु गोविंद सिंह व् उनके दो बड़े बेटे चमकोर गड़ी आ गये मुगल सेना पीछा करते हुये पहुंच गई व् चमकोर गढ़ी को चारों तरफ से घेर लिया गुरु साहब ने चालीस सिखों के साथ मुगल सेना का जमकर मुकाबला किया युद्ध में बड़े साहिबजादे शहीद हो गये पांच प्यारे का हुक्म मानकर गुरु गोविंद सिंह चमकोर गढ़ी से ताली मारकर निकल गये व् माछिवादा आ गये माछिवादा में गुरु साहब ने जंड के नीचे आराम किया वहा पर गुरुद्वारा चरण कमल सुभायेमान हे वह एतिहासिक जंड भी मोजूद हे जिसके दर्शन करने हेतु देश भर से संगत आती हे वही पास में बने कुए पर गुरु साहब ने जल ग्रहण किया था वः एतिहासिक कुआ भी मोजूद हे जब गुरु गोबिंद सिंह माछीवाड़ा में थे, तो उन्होंने माछीवाड़ा के जंगल में “मितर प्यारे नू हाल मुरीदा दा कहना”
युद्ध के दोरान भाई धरम सिंह , मान सिंह और दया सिंह गुरु जी से बिछुड़ गये थे जो माछीवाड़ा के जंगलो में फिर से मिले माछीवाड़ा इसकी जानकारी स्थानीय मसंद गुलाबा को मिली तो वे गुरु साहब व् सिखों को अपने घर ले गये जहा पर गुरुद्वारा चोबारा साहिब सुभायेमान हे गुरु के दो पठान अनुयायी, जिनका नाम नबी खान और गनी खान था, जिनका निवास माछीवाड़ा के पास स्थित था गुरु साहब को अपने घर ले गये जहा पर गुरुद्वारा गनी खा नबी खा सुभायेमान हे उपरांत गुर सिखों ने गुरु साहिब को क्रपान भेंट की थी जहा पर गुरुद्वारा क्रपान भेंट सुभायेमान हे माछीवाड़ा में चार एतिहासिक गुरुद्वारा साहिब हे
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